pm fasal bima yojna

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 

भारत एक कृषि प्रधान देश है।  कृषि कार्यों के माध्यम से ही देश की अधिकतम जनसँख्या अपना पालन पोषण करते है।  ऐसे में कृषि कार्यों को प्रोत्साहन देना भारत सरकार का मुख्य दायित्वा होता है।  इसीलिए भारत सरकार द्वारा कृषि कार्यों को प्रोत्साहन हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनाई गई है जिसके माध्यम से देश […]

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रूपकुंड महोत्सव.

रूपकुंड महोत्सव

उत्तराखंड अपनी परम्परागत रीती रिवाजों से जुड़ा हुवा है।  उत्तराखंड की कला और संस्कृति को समझ पाना बहुत मुश्किल है। लोक कथाओं पर आधारित यहाँ के लोग विभिन्न प्रकार के लोकपर्व,त्यौहार एवं मेलों को मानते है।   यह मेलें मुख्या रूप से स्थानिया लोगों के द्वारा बनायें हुए होते है जो की उनकी सांस्कृतिक छटा को

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उत्तराखंड के प्रमुख आंदोलनकर्ता

उत्तराखंड का असित्वा  बनायें रखने में एवं राज्य को  खास पहचान दिलाने में राज्य के महान लोंगो का योगदान अविश्वसनीय एवं अकल्पनीय है।  देवभूमि में पले इन महान लोगों ने उत्तराखंड को देवभूमि बनायें रखने में अपने बहुमूल्य प्राण निछावर किये है।  आज जब भी उनकी कहानियों एवं योगदान को पढ़ने का  समय  मिलता है

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मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना

जैसा की हम सभी लोग जानते है की कोरोना काल ने जहाँ लोगों की नोकरिया छीनी वही कुछ ऐसे लोग भी है जिन्होंने अपने परिवार के सदस्य  को भी  खोया है।  इस मुश्किल घडी में जहाँ लोगों को दो वक्त की रोटी उपलब्ध नहीं हो  पाई। ऐसी परिस्थिति  में कुछ ऐसे भी परिवार है जिन्होंने

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प्रसिद्ध गौचर मेला

प्रसिद्ध गौचर मेला

उत्तराखंड भारत  का एकमात्र ऐसा जिला है जिसे मेलों एवं पर्वों का जिला भी कहा जाता है।  मेलों एवं पर्वों का यह एक ऐसा राज्य  है जहाँ पर स्थानिया संस्कृति के साथ भारतीय संस्कृति को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाता है।  खास तौर पर मेलों का आयोजन किसी धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के

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हर वर्ष 23 अप्रैल को यह  भव्य महोत्सव मेला वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली जो को स्मृति एवं  सम्मान  के लिए आयोजित किया जाता है।

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्मृति मेला

देवभूमि उत्तराखंड  शुरुवात से ही वीरसपूतों की भूमि रही है।  प्राचीन काल से यह दिव्य एवं महान  आत्माओं का निवास स्थान रहा है।   इस लिए यहाँ पर विभिन्न पर्व एवं मेलें का आयोजन किया जाता है।  उन्ही मेलों में से एक है वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्मृति मेला जो की उत्तराखंड में बड़े ही हर्ष

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Tarkeshwar mandir

ताडकेशवर महादेव मंदिर

प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण  उत्तराखंड अपनी कला संस्कृति एवं रीतिरिवाजों के अलावा अपने पवित्र मंदिर एवं धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है।  देवभूमि उत्तराखंड में विभिन्न धार्मिक स्थल है जो अपने ऐतिहासिक महत्व को जीवंत रखते आ रहे है।  जिनके बारें में अक्सर हमें पौराणिक कहानियों एवं इतिहास के पन्नों में भी पढ़ने को

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माघ मेला

उत्तराखंड अपनी परम्परागत रीती रिवाजों से जुड़ा हुवा है। लोक कथाओं पर आधारित यहाँ के लोग विभिन्न प्रकार के लोकपर्व,त्यौहार एवं मेलों को मानते है।  अपनी संस्कृति को जीवंत रखते हुए उत्तराखंड वासी  तरह तरह के मेलों का आयोजन करते है। यह मेलें मुख्या रूप से स्थानिया लोगों के द्वारा बनायें हुए होते है जो

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प्रसिद्ध उत्तरायनी मेला

प्रसिद्ध उत्तरायनी मेला

राज्य की संस्कृति वहाँ के लोगों और उनके रहन सहन से ज्ञात होती है।  लोगों के रहन सहन का हिस्सा स्थनीय खानपान एवं उनके पारम्परिक पोशाक , लोकपर्व, मेलें, महोत्सव, आदि है।  उत्तरायणी मेला उत्तराखंड के प्रमुख मेलों में से एक है।  जो की उत्तराखंड की संस्कृति, कला, और लोगों के आपसी प्रेम को एक

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समुद्र तल से 1615 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जिला चम्पावत उत्तराखंड के 13  जिलों में से एक है।  प्रकृति की सुरम्य घाटियों एवं मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध चम्पावत 1,766  वर्ग किमी० के क्षेत्रफल में फैला हुवा है। 

जिला चम्पावत परिचय एवं इतिहास

जिला चम्पावत उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों के मध्य में स्थित  एक पर्वतीय जिला है जो की आकर्षक मंदिरों एवं वस्तु शिल्पकला के लिए मशहूर है।  उत्तररखण्ड देवभूमि के नाम से विख्यात है।  इसके  अधिकांश भाग में अधयत्मिक एवं दिव्या आत्माओं का निवास है।  जहाँ पर पवित्र मंदिर, नदिया और धार्मिक स्थल अपने आप में एक

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